Monday 17 January 2022

Homeopathic Doctor In Bareilly Dr. Ashutosh Sharma

 With your blessings and the grace of the almighty,  I am working as a homeopathic doctor in Bareilly. this is my utmost priority to cure the sufferer as soon as possible. 

Using homeopathy we can remove the cause of disease and thus can remove the diseases to a whole extent.

you can contact me 

Dr. Ashutosh Sharma

429/3, near lalita devi temple

Biharipur Dhal, 

Bareilly, Uttar Pradesh

https://www.doctorashutosh.com/

Thursday 16 September 2021

माँ शोक दुःख निवारिणी, हे सर्व मंगलकारिणी

माँ शोक दुःख निवारिणी, हे सर्व मंगलकारिणी

तू ही शुम्भ-निशुम्भ विदारिणी, तू चंड-मुण्ड संहारिणी।

हे महिष्दानव मर्दिनी, काली है तू ही कपालिनी

हे माँ तू सृष्टि सृजन करे, तू ही दानवों का दलन करे।

दुर्गा तू ही - लक्ष्मी भी तू, तू ही सरस्वती का स्वरुप है

कण कण में तू ही समायी है, कभी छाँव है कभी धूप है।

हे चिन्तपूर्णि नमोस्तते, हे ज्वाला देवी नमोस्तते,

चामुण्डा देवी नमोस्तते, माँ नैना देवी नमोस्तते।

मीनाक्षी देवी नमोस्तते, कामाख्या देवी नमोस्तते

हे भद्रकाली नमोस्तते, माँ शेराँवाली नमोस्तते।

हे सर्वशक्ति नमोस्तते, सुर और भक्ति नमोस्तते।

नमोस्तते, नमोस्तते - नमोस्तते, नमोस्तते .......।

Thursday 4 April 2019

अल्फ़ाज़ या जज़्बात

यूँ तो मैं खुद में भी कम न था,
सच में गम करने को कोई गम ना था,
आरज़ू थी या अजीब सा पागलपन,
ये मोहब्बत की रिवाज़े थी या इंसानियत का फ़र्ज़,
ये प्यार का दस्तूर था या मेरी ज़िद्द की फैसला,
जो भी था ये तो खुद खुदा ही जानता होगा,
हम तो मोहब्बत के दस्तूर में ही डूबते गए,
तेरे खंज़र को भी फूल समझते गए,
जानते थे इस अंजाम को भी पहले से,
फिर भी तुझे चाहने की भूल करते गए,
हर जुल्म तेरा सहकर भी तुझे रब से मांगते रहे,
अपनी बर्बादी का आलम भी जानते रहे,
तेरी हर खता को तुझसे चुरा कर खुद में समेटा,
खुदा कसम तेरे लिये खुद को गुनेहगार किया,
फिर तू मेरा ना बन सका, मुझमें बसकर भी मेरा ना हुआ।
आज भी भरोसा उस खुदा पे बना है।
जिसने मेरी हर लकीर को बुना है।

Saturday 21 July 2012

my favourite linese

Tere dukh aur dard ka mujhpar bhi ho aisa asar,tu rahe bhukha to mujhse bhi na khaya jaaye.
Teri manzil ko agar rasta na mai dikhla sakun,mujhse bhi meri manzil, ko na paya jaaye.
Tere tapte sheesh ko gar,chhanv na dikhla sakun,mere sar ki chanv se,sooraj saha na jaaye.
Tere armaano ko gar mai, pankh na lagava sakun,meri aashaon ke pairon se chala na jaye.
Tere andhiyare ghar mai roshan agar na kar sakun,mere angan ke diye se bhi jala na jaye.
Tere ghavon ko agar marham se na sahla sakun,mere nanhe jakhm ko barson bhara na jaaye.
Aag bujhti hai yahan,Ganga mein bhi Jhelum mein bhi,Koi batlaye kahan, jaakar nahaya jaaye.